भारत की पहली यूनिवर्सिटी कौन है

नालंदा यूनिवर्सिटी 
भारत की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी नालंदा यूनिवर्सिटी है जो भारत के बिहार राज्य के पटना शहर में स्थित है। यह यूनिवर्सिटी पटना से 55 मील दूर दक्षिण-पूर्व में स्तिथ है। इसको राजा कुमार गुप्त ने नालंदा में पहला मठ के रूप में बनाया। इसमें छह मठ थे। यह बौद्ध भिक्षुओं को training देने के लिए बनाया गया था। उस समय यह न तो शहर, गांव, कस्बे से बहुत दूर था और न ही करीब। इसीलिए यह भिक्षुओं द्वारा बौद्ध अध्ययन की और रिसर्च के लिए एक idol सेंटर के लिए चुना गया था। नालंदा को सात गावों के राजस्व से बनाया गया था जो वहां के राजा द्वारा प्रदान किये गए थे। नालंदा यूनिवर्सिटी 30 एकड़ के क्षेत्र में फैली हुयी थी। इस यूनिवर्सिटी में तीन libraries थीं जिनके नाम थे –

  1. रत्न-सागर
  2. रत्न-निधि
  3. रत्न-रंजन

इसमें एक लाइब्रेरी जो सबसे बड़ी थी वो नौ मंज़िला ऊँची थी। इसमें मठों का निर्माण राजा बुद्ध गुप्त (इ.सन्न 455-467),जतगाथा गुप्त (इ. सन्न 467-500), बालादित्य (इ. सन्न  500-525) और विजरा (500) द्वारा किया गया था। राजा बालादित्य ने एक तीर्थस्थल भी बनवाया था जो 300 फिट ऊँचा था। बालादित्य के बेटे विजरा ने पांचवां मठ बनवाया और राजा हर्ष शिलादित्य ने छठा मठ बनवाया और 9 ऊँची दीवारों के साथ इस यूनिवर्सिटी को घेर दिया। इस यूनिवर्सिटी में बौद्धों के लिए महायान का अभ्यास अनिवार्य था। इस यूनिवर्सिटी में

  • विज्ञान
  • चिकित्सा
  • ललित-कला
  • साहित्य
  • थेरवाद वाणिज्य
  • प्रशासन और
  • खगोल विज्ञान आदि विषयों को पढ़ाया जाता था।

10वीं शताब्दी में जब व्हेन त्सांग नामक शख्स ने इस विद्यालय में प्रवेश लिया तब उस समय 10,000 निवासी छात्र के साथ साथ 1510 शिक्षक और लगभग 1500 कार्यकर्ता थे। व्हेन त्सांग बताता है की यहां हर दिन 100 व्याख्यान दिए जाते थे। यहां का अनुशासन बहुत हीअच्छा था। यहां तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया, सुमात्रा, जावा और श्रीलंका जैसे देशों के छात्र पढ़ाई करते थे। इस यूनिवर्सिटी में प्रवेश पाने के लिए मौखिक (Oral) परीक्षा होता था। यह परीक्षा प्रवेश हॉल में एक प्रोफेसर द्वारा लिया जाता था। इन्हे द्वार पंडित के नाम से जाना जाता था। यहां संस्कृत की जानकारी अनिवार्य थी क्योंकि यही शिक्षा का माध्यम था। बौद्ध धर्म में उच्च शिक्षा पाने के लिए भारत आने वाले सभी चीनी भिक्षुओं को पहले जावा जाना पड़ता था संस्कृत जानने के लिए। इसमें विदेशी छात्र 20% ही कड़ी परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाए और भारतीय छात्र 30% ही उत्तीर्ण हो पाए और इस यूनिवर्सिटी में प्रवेश पाए।

राजा बख्तियार खिलजी के नेतृत्व में खिलजी के आक्रमणकारियों ने नालंदा में आग लगा दी। इससे पहले यह यूनिवर्सिटी 1000 साल तक फलता-फूलता रहा। नालंदा के खँडहर और खुदाई भारत सरकार द्वारा एक Museum में सुरक्षित है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्राचीन यूनिवर्सिटी के करीब एक स्थल पर नव नालंदा विहार का उद्घाटन किया है। मुसलमानों ने यूनिवर्सिटी के विचार को पश्चिम में पहुँचाया, और उसके बाद यूनिवर्सिटी की उत्पत्ति पश्चिमी दुनिया में आयी।

 

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